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निर्देशन का अर्थ, परिभाषा और विशेषताएँ (Guidance: Meaning, Definitions, and Characteristics)

 



1. परिचय (Introduction)

निर्देशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक अनुभवी व्यक्ति (जैसे शिक्षक या परामर्शदाता) किसी दूसरे व्यक्ति को उसकी समस्याओं को सुलझाने और सही रास्ता चुनने में मदद करता है। जीवन में हर कदम पर हमें चुनाव करने होते हैं—चाहे वह पढ़ाई हो, करियर हो या व्यक्तिगत जीवन। निर्देशन व्यक्ति को इस योग्य बनाता है कि वह अपनी क्षमताओं को पहचान सके और खुद के निर्णय स्वयं ले सके।


2. निर्देशन का अर्थ (Meaning of Guidance)

निर्देशन का शाब्दिक अर्थ है 'पथ-प्रदर्शन करना' या 'रास्ता दिखाना'

·        यह सहायता देने की एक सतत (continuous) प्रक्रिया है।

·        यह व्यक्ति पर कोई निर्णय थोपता नहीं है, बल्कि उसे निर्णय लेने के काबिल बनाता है।

·        इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्तियों, योग्यताओं और मानसिक स्तर से परिचित कराना है ताकि वह समाज में बेहतर तरीके से तालमेल (Adjustment) बिठा सके।


3. निर्देशन की प्रमुख परिभाषाएँ (Definitions of Guidance)

विद्वानों ने निर्देशन को निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया है: 

Ø  क्रो एवं क्रो के अनुसार: "निर्देशन योग्य परामर्शदाताओं द्वारा दी जाने वाली वह सहायता है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन का रास्ता खुद चुनता है और अपने दायित्वों को संभालता है।"

Ø  शर्ले हैमरिन के अनुसार: "व्यक्ति को स्वयं पहचानने में सहायता करना, जिससे वह अपने जीवन में आगे बढ़ सके, निर्देशन कहलाता है।"

Ø  माध्यमिक शिक्षा आयोग के अनुसार: "यह छात्र-छात्राओं को अपने भविष्य की योजना बुद्धिमत्तापूर्वक बनाने में दी जाने वाली सहायता है।"

Ø  स्किनर (Skinner) के अनुसार: "निर्देशन युवाओं को स्वयं के प्रति, दूसरों के प्रति और परिस्थितियों के प्रति सामंजस्य स्थापित करने में सहायता देने की एक प्रक्रिया है।"

Ø  मैथ्यूज (Mathews) के अनुसार: "निर्देशन वह सहायता है जो छात्र को स्वयं को समझने, अपनी योग्यताओं को पहचानने और जीवन की समस्याओं को सुलझाने के लिए दी जाती है।"

Ø  आर्थर जे. जोन्स (Arthur J. Jones) के अनुसार: "निर्देशन का अर्थ चुनाव करने में मदद देना है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को अपने जीवन के लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने की क्षमता विकसित करने में सहायता करना है।"

Ø  वुडवर्थ (Woodworth) के अनुसार: "निर्देशन व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का ज्ञान कराने और उनका उचित उपयोग करने में सहायता प्रदान करने की एक विधि है।"

Ø  ब्रिवर (Brewer) के अनुसार: "निर्देशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति को अपनी समस्याओं को समझने और उन्हें सुलझाने के लिए मार्गदर्शन मिलता है, ताकि वह एक सुखी और सफल जीवन जी सके।"


4. निर्देशन की विशेषताएँ (Characteristics of Guidance)

निर्देशन की प्रकृति और महत्व को समझने के लिए इसकी निम्नलिखित विशेषताएँ प्रमुख हैं:

1.     जीवनपर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया: निर्देशन केवल स्कूल तक सीमित नहीं है, यह जन्म से लेकर मृत्यु तक चलने वाली एक निरंतर प्रक्रिया है।

2.     आत्म-निर्भर बनाना: निर्देशन का उद्देश्य व्यक्ति की समस्या को खुद हल करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को इतना सक्षम बनाना है कि वह अपनी समस्या का समाधान स्वयं कर सके।

3.     सर्वांगीण विकास: यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और व्यावसायिक विकास में सहायक होता है।

4.     वैयक्तिक सहायता: यह प्रत्येक व्यक्ति की रुचि, क्षमता और योग्यता को ध्यान में रखकर दी जाने वाली व्यक्तिगत सहायता है।

5.     शिक्षा का अभिन्न अंग: निर्देशन और शिक्षा एक-दूसरे से जुड़े हैं। बिना सही निर्देशन के अच्छी शिक्षा अधूरी है।

6.     समायोजन में सहायक: यह व्यक्ति को नए वातावरण, समाज और विषम परिस्थितियों में तालमेल (Adjustment) बिठाने में मदद करता है।

7.     भविष्य की तैयारी: इसके माध्यम से छात्र अपनी योग्यताओं के अनुसार सही विषय और सही रोजगार (Career) का चुनाव कर पाते हैं।

8.     प्रशिक्षित व्यक्तियों का कार्य: हालांकि निर्देशन कोई भी बड़ा दे सकता है, लेकिन व्यावसायिक रूप से यह अनुभवी और प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा दिया जाता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

संक्षेप में, निर्देशन एक ऐसी 'प्रकाश की किरण' है जो व्यक्ति को अंधकार से निकाल कर सफलता के मार्ग पर ले जाती है। यह व्यक्ति को समाज का एक उपयोगी अंग बनाने और उसकी छिपी हुई शक्तियों को जगाने का मूल प्रयास है।

 

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