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निर्देशन की प्रकृति / Nature of Guidance

 

अक्सर हम 'निर्देशन / मार्गदर्शन' (Guidance) को केवल सलाह देने का एक जरिया मानते हैं, लेकिन वास्तव में यह इससे कहीं अधिक गहरा है। सरल शब्दों में कहें तो निर्देशन / मार्गदर्शन का अर्थ है—किसी व्यक्ति (विशेषकर बच्चे) को खुद की पहचान कराने में मदद करना। यह एक ऐसा तरीका है जिससे इंसान अपनी खूबियों (Assets) और अपनी कमियों (Liabilities) को पहचान सके, ताकि वह एक ऐसे भविष्य की योजना बना सके जहाँ उसे सफलता और संतुष्टि दोनों मिले।

यहाँ निर्देशन / मार्गदर्शन की प्रकृति और उसकी जरूरत को आसान भाषा में समझाया गया है:

 


निर्देशन / मार्गदर्शन की प्रकृति

निर्देशन / मार्गदर्शन केवल बातचीत नहीं, बल्कि एक सहायक माहौल है। यह कुछ मानवीय सिद्धांतों पर टिका है:

·        संपूर्ण विकास पर जोर: इसका मकसद केवल पढ़ाई में अच्छे नंबर लाना नहीं है। यह इंसान के शारीरिक, सामाजिक और मानसिक, यानी सर्वांगीण विकास पर ध्यान देता है।

·        हर इंसान की विशिष्टता का सम्मान: दुनिया में हर व्यक्ति अलग और खास है। निर्देशन / मार्गदर्शन इसी सिद्धांत पर काम करता है कि उम्र, लिंग या रूप-रंग की परवाह किए बिना हर इंसान के सम्मान और गरिमा का ख्याल रखा जाए।

·        सहयोग की भावना: निर्देशन / मार्गदर्शन कभी किसी पर थोपा नहीं जा सकता। यह एक टीम वर्क की तरह है। जब तक मदद लेने वाला और मदद देने वाला एक-दूसरे का सहयोग नहीं करते, इसके सही नतीजे नहीं मिलते।

·        जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया: यह स्कूल खत्म होने के साथ खत्म नहीं होता। यह घर से शुरू होता है, स्कूल में आगे बढ़ता है और समाज में जीवनभर हमारे साथ रहता है।

 

निर्देशन / मार्गदर्शन के नियम

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एक अच्छे निर्देशन / मार्गदर्शन में ये बातें होनी जरूरी हैं:

1.     निरंतरता: मदद जीवन के हर पड़ाव पर उपलब्ध होनी चाहिए।

2.     विस्तार: यह केवल छात्रों के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जिसे इसकी जरूरत है।

3.     विशेषज्ञ की सलाह: छोटी-मोटी सलाह कोई भी दे सकता है, लेकिन जीवन के गंभीर फैसलों के लिए विशेषज्ञों की राय जरूरी है ताकि सही दिशा मिल सके।

4.     लचीलापन: चूँकि हर व्यक्ति की जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए निर्देशन / मार्गदर्शन का तरीका भी व्यक्ति के अनुसार बदलना चाहिए।

 

आज के समय में इसकी जरूरत क्यों है?

आज की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण लोग पहले से कहीं ज्यादा तनाव में हैं। ऐसे में निर्देशन / मार्गदर्शन हमारी मदद करता है:

·        खुद को बेहतर तरीके से समझने में ताकि हम भटकाव महसूस न करें।

·        करियर के सही चुनाव करने में।

·        पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को बेहतर बनाने में।

·        आज के दौर के मानसिक और भावनात्मक दबावों को संभालने में।

अंततः, निर्देशन / मार्गदर्शन लोगों को अपना भविष्य समझदारी से चुनने में मदद करने की एक "कठिन कला" है। यह सिर्फ एक नौकरी ढूँढने के बारे में नहीं है, बल्कि एक बदलती हुई दुनिया में खुद को ढालने के बारे में है। जब हम अपने स्कूलों और समाज में सही निर्देशन / मार्गदर्शन को जगह देते हैं, तो हम हर व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनने का मौका देते हैं।

यह आज के 'हम' और भविष्य के 'बेहतर हम' के बीच का एक मजबूत पुल है।

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