समावेशी शिक्षा की सीढ़ियाँ: बच्चों को
सामान्य स्कूल से जोड़ने के 7 चरण (Phases of Inclusive Education)
शारीरिक या मानसिक रूप से विशिष्ट
बच्चों को धीरे-धीरे सामान्य शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए 7 अलग-अलग स्तर या चरण बनाए गए
हैं । एक भावी शिक्षक के रूप में आपको यह समझना
होगा कि हर बच्चा एक ही तरीके से नहीं सीख सकता, इसलिए
उनके लिए ये अलग-अलग चरण बनाए गए हैं:
स्तर 1: पूरी तरह सामान्य कक्षा में पढ़ाई (Full-time Integration)
इस पहले स्तर में विशेष बच्चा पूरे
दिन सामान्य बच्चों के साथ बैठकर सामान्य कक्षा में ही पढ़ता है । जब भी उसे किसी विशेष मदद की ज़रूरत होती
है, तो स्कूल में मौजूद विशेषज्ञ उसकी सहायता
करते हैं ।
- मुख्य
जानकारी: इसे "पूर्ण समावेशन" (Full Inclusion) कहते हैं। यहाँ सामान्य कक्षा के शिक्षक (General Teacher) की भूमिका
सबसे बड़ी होती है ।
- उदाहरण: कक्षा 7 में पढ़ने वाला कबीर देख नहीं सकता, लेकिन वह पूरे दिन अपने सामान्य
दोस्तों के साथ बैठकर लेक्चर सुनता है। जब इतिहास का मैप (नक्शा) समझना होता
है, तो स्पेशल
एजुकेटर उसे 'उभरे हुए
मैप'
(Tactile Map) को छूकर समझा देते हैं।
स्तर 2: सामान्य कक्षा के साथ थोड़े समय की विशेष
मदद (Resource Room Support)
यहाँ बच्चा ज़्यादातर समय सामान्य
कक्षा में ही रहता है । लेकिन
दिन के कुछ खास घंटों में, उसे विशेष थेरेपी या विशेष पढ़ाई के लिए
स्कूल के ही एक अलग कमरे (Resource Room) में जाना होता है ।
- मुख्य
जानकारी: इसे "पुल-आउट मॉडल" (Pull-out Model) कहते हैं। इसमें बच्चा अपनी कक्षा से
बाहर जाकर अपनी गति से सीखता है और फिर वापस आ जाता है।
- उदाहरण: पूजा
सामान्य कक्षा में पढ़ती है, लेकिन गणित के पीरियड में उसे डर लगता है क्योंकि उसे
डिस्केल्कुलिया (गणित सीखने की अक्षमता) है। इसलिए गणित के समय वह स्कूल के 'रिसोर्स रूम' में जाकर खेल-खेल में गिट्टियों और
चित्रों से गणित सीखती है।
स्तर 3: विशेष कक्षा में पढ़ाई, खेलकूद सबके साथ (Part-time Integration)
इस श्रेणी में बच्चे अपनी पढ़ाई
मुख्य रूप से अपनी 'स्पेशल क्लास' में ही करते हैं । लेकिन खेलकूद, लंच ब्रेक, सुबह की
प्रार्थना या संगीत जैसी गतिविधियों में वे सामान्य बच्चों के साथ शामिल होते हैं ।
- मुख्य
जानकारी: यह उन
बच्चों के लिए है जिन्हें पढ़ाई में बहुत ज़्यादा व्यक्तिगत ध्यान (1-on-1 attention) की ज़रूरत
होती है, लेकिन वे
सामाजिक रूप से सबके साथ घुल-मिल सकते हैं।
- उदाहरण: ऑटिज्म से
ग्रसित आर्यन अपनी पढ़ाई स्पेशल रूम में करता है जहाँ शांति होती है। लेकिन
जब लंच का समय होता है या स्कूल का वार्षिकोत्सव (Annual Function) होता है, तो वह पूरे स्कूल के साथ डांस और नाटक
में भाग लेता है।
स्तर 4: हॉस्टल वाले स्कूल के साथ सामान्य पढ़ाई (Residential School Integration)
इसमें बच्चे हॉस्टल वाले विशेष स्कूल
(आवासीय विद्यालय) में रहते हैं, लेकिन उनके पाठ्यक्रम और पढ़ाई का कुछ
हिस्सा पास के सामान्य स्कूल के साथ जोड़कर कराया जाता है ।
- मुख्य
जानकारी: यह उन
बच्चों के लिए बहुत अच्छा है जो ग्रामीण इलाकों में रहते हैं जहाँ रोज़ स्कूल
आने-जाने की सुविधा नहीं होती।
- उदाहरण: दृष्टिबाधित
बच्चे एक आवासीय विद्यालय (हॉस्टल) में रहते हैं जहाँ उन्हें रहना-खाना
सिखाया जाता है, लेकिन दिन
के समय वे पास के एक सामान्य पब्लिक स्कूल में जाकर विज्ञान और सामाजिक
विज्ञान की कक्षाएं लेते हैं।
स्तर 5: उल्टा समावेशन - सामान्य बच्चों का विशेष
स्कूल में आना (Reverse Integration)
यह बहुत ही सुंदर और आधुनिक तरीका
है! इसमें सामान्य बच्चों को दिव्यांग बच्चों
के स्पेशल स्कूल में बुलाया जाता है, ताकि
दोनों में आपसी सहयोग और भाईचारा पैदा हो सके ।
- मुख्य
जानकारी: यह
सामान्य बच्चों के मन से दिव्यांगता का डर और हिचकिचाहट दूर करने का सबसे
बेहतरीन तरीका है।
- उदाहरण: एक
मूक-बधिर (सुनने और बोलने में असमर्थ) बच्चों के स्कूल में पास के सामान्य
स्कूल के बच्चों को बुलाया गया। सबने मिलकर 'बिना बोले सिर्फ इशारों' (Sign Language) से मूक अभिनय (Mime) का नाटक किया। सामान्य बच्चों ने जाना कि बिना बोले भी
कितनी गहरी दोस्ती हो सकती है।
स्तर 6: स्कूल और घर की जुगलबंदी (Home-bound Education)
इस स्तर पर बच्चे को सामान्य स्कूल
में तो पढ़ाया ही जाता है, साथ ही उसके घर पर जाकर भी विशेष कार्यक्रम
चलाए जाते हैं ताकि पढ़ाई घर और स्कूल दोनों जगह प्राकृतिक रूप से चले ।
- मुख्य
जानकारी: इसमें
माता-पिता की ट्रेनिंग (Parent Training) सबसे महत्वपूर्ण होती है । शिक्षक माता-पिता को सिखाते हैं कि
घर पर बच्चे की देखभाल और पढ़ाई कैसे जारी रखनी है।
- उदाहरण: गंभीर
सेरेब्रल पाल्सी (लकवा) से पीड़ित बच्चा हफ्ते में सिर्फ तीन दिन स्कूल आ
पाता है। बाकी के तीन दिन विशेष शिक्षक उसके घर जाकर माता-पिता को बताते हैं
कि बच्चे को घर के काम और पढ़ाई में कैसे व्यस्त रखना है।
स्तर 7: अस्पताल या इलाज की जगह पर पढ़ाई (Hospital Instruction)
अगर कोई बच्चा बहुत गंभीर रूप से
बीमार है या अस्पताल में भर्ती है, तो
शिक्षक अस्पताल जाकर या उसके इलाज की जगह पर जाकर थोड़े समय के लिए उसे पढ़ाते हैं ।
- मुख्य
जानकारी: इसे "शॉर्ट-टर्म इंस्ट्रक्शन" (Short-term Instruction) कहते हैं । इसका उद्देश्य यह है कि बीमारी के
कारण बच्चे का साल बर्बाद न हो।
- उदाहरण: एक बच्चा
जिसका एक्सीडेंट हो गया है और वह 3 महीने तक स्कूल नहीं आ सकता। स्कूल का शिक्षक हफ्ते में दो
बार अस्पताल जाकर उसे ज़रूरी पाठ पढ़ा देता है ताकि वह परीक्षा दे सके और
उसका साल बच सके।
बी.एड. छात्रों के लिए परीक्षा टिप (Exam Special Box)
परीक्षा में उत्तर को सजाने के लिए
सातों चरणों को इस आसान प्रवाह चार्ट (Flow Chart) से दर्शाएं:
- पूर्ण
समावेशन (सबसे आसान
और प्राकृतिक)
- आंशिक
समावेशन (सामान्य +
रिसोर्स रूम)
- गतिविधि
आधारित समावेशन (पढ़ाई अलग, खेल साथ)
- आवासीय
समावेशन (हॉस्टल +
सामान्य स्कूल)
- रिवर्स
समावेशन (सामान्य
बच्चे स्पेशल स्कूल में)
- गृह
आधारित समावेशन (स्कूल +
घर)
- चिकित्सीय
समावेशन (अस्पताल
में पढ़ाई)
2: समावेशी शिक्षा का दायरा (Scope of Inclusive Education)
समावेशी शिक्षा का दायरा बहुत बड़ा
और लचीला है। यह किसी एक प्रकार के बच्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर उस बच्चे को गले लगाता है जिसे सीखने में थोड़ी
अलग मदद की ज़रूरत है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इसके अंतर्गत कौन-कौन से
बच्चे आते हैं:
1. शारीरिक चुनौतियों वाले बच्चे (Orthopedically Handicapped)
इसमें वे बच्चे आते हैं जिन्हें
चलने-फिरने, बैठने या हाथ-पैर हिलाने में दिक्कत होती
है (जैसे पोलियो, दुर्घटना या जन्मजात समस्या के कारण)।
- परीक्षा
के लिए मुख्य बात: इन्हें कक्षा में किसी विशेष मानसिक मदद की नहीं, बल्कि 'भौतिक मदद' (जैसे रैंप, व्हीलचेयर, सुलभ डेस्क) की ज़रूरत होती है।
- आसान
उदाहरण: कक्षा का
एक छात्र बैसाखी (Crutches)
के सहारे
चलता है। शिक्षक की
जिम्मेदारी है कि उसकी क्लास हमेशा ग्राउंड फ्लोर (भू-तल) पर लगे ताकि उसे
सीढ़ियां न चढ़नी पड़ें।
2. सुनने और बोलने में असमर्थ बच्चे (Hearing & Speech Impaired)
वे बच्चे जो पूरी तरह या आंशिक रूप
से सुन और बोल नहीं सकते।
- परीक्षा
के लिए मुख्य बात: इन बच्चों के लिए शिक्षक को दृश्य साधनों (Visual Aids) जैसे ब्लैकबोर्ड, फ्लैशकार्ड और इशारों (Sign Language) का अधिक उपयोग करना चाहिए।
- आसान
उदाहरण: शिक्षक
कक्षा में जब भी कुछ पढ़ाता है, तो वह मुंह ढँक कर नहीं पढ़ाता, ताकि बच्चा होठों की हरकत (Lip Reading) देखकर समझ सके कि क्या कहा जा रहा है।
3. देखने में असमर्थ बच्चे (Visually Impaired)
वे बच्चे जो आंशिक रूप से (कम देखना
या एक आंख से देखना) या पूरी तरह से देख नहीं सकते।
- परीक्षा
के लिए मुख्य बात: जो बच्चे ब्रेल लिपि (Braille) सीख चुके हैं, उन्हें सामान्य स्कूल में लाकर ऑडियो रिकॉर्डिंग और छूकर
महसूस करने वाले मॉडल से पढ़ाया जाता है।
- आसान
उदाहरण: शिक्षक
ग्लोब (पृथ्वी का मॉडल) से पढ़ाते समय ऐसा ग्लोब उपयोग करता है जिसमें पहाड़
और नदियाँ उभरी हुई हों, ताकि दृष्टिबाधित बच्चा उन्हें छूकर समझ सके।
4. सीखने में धीमे या अक्षम बच्चे (Learning Disabilities & Slow
Learners)
ये बच्चे शारीरिक रूप से बिल्कुल
सामान्य दिखते हैं, लेकिन इन्हें पढ़ने (डिस्लेक्सिया), लिखने (डिस्ग्राफिया) या गणित हल करने (डिस्केल्कुलिया) में
परेशानी होती है।
- परीक्षा
के लिए मुख्य बात: ऐसे बच्चों की बुद्धिमत्ता (IQ) कम नहीं होती, बस उनके सीखने का तरीका अलग होता है। इन्हें रटाने के बजाय खेल-विधि से
सिखाना चाहिए।
- आसान
उदाहरण: 'तारे
ज़मीन पर' फिल्म का
ईशान अवस्थी! वह अक्षरों को ठीक से पहचान नहीं पाता था, लेकिन कला (Drawing) में उस्ताद था। समावेशी शिक्षा ऐसे बच्चों के इसी
छिपे हुए हुनर को पहचानती है।
5. एक से अधिक चुनौतियों वाले बच्चे (Multiple Disabilities)
वे बच्चे जिनमें एक साथ दो या तीन
अक्षमताएं होती हैं (जैसे देख भी नहीं सकते और सुन भी नहीं सकते)।
- परीक्षा
के लिए मुख्य बात: इन बच्चों को सबसे ज़्यादा व्यक्तिगत ध्यान (Personal Care) की ज़रूरत होती है। इनके लिए
विशेष रूप से प्रशिक्षित टीचर की मदद ली जाती है।
- आसान
उदाहरण: महान
लेखिका 'हेलेन
केलर' (Helen
Keller) देख और
सुन नहीं सकती थीं, लेकिन सही
मार्गदर्शन (स्पर्श विधि) से वे विश्व प्रसिद्ध लेखिका बनीं।
शिक्षा के स्तर का दायरा (Scope of Levels)
समावेशी शिक्षा सिर्फ कक्षा 1 से 5 तक के लिए नहीं है, इसका कार्य-क्षेत्र बहुत व्यापक है:
- शुरुआती
शिक्षा (Early
Childhood): आंगनवाड़ी
और नर्सरी स्तर से ही बच्चों की पहचान करना।
- माध्यमिक
और उच्च शिक्षा (+2 स्तर): बोर्ड परीक्षाओं में दिव्यांग बच्चों को अतिरिक्त समय या
राइटर (लिखने वाला सहायक) देना।
- व्यावसायिक
शिक्षा (Vocational
Education): बच्चों को
आत्मनिर्भर बनाने के लिए कंप्यूटर, सिलाई, पेंटिंग या क्राफ्ट सिखाना।
- माता-पिता
का मार्गदर्शन (Parents Counselling): अक्सर दिव्यांग बच्चों के माता-पिता हीन भावना या तनाव में
रहते हैं। स्कूल
उनकी काउंसलिंग करता है ताकि वे बच्चे का सही साथ दे सकें।
बी.एड. परीक्षा के लिए विशेष माइंड-मैप (Mind-Map Tool)
परीक्षा में कॉपी को आकर्षक बनाने के
लिए इस फ्लो-चार्ट का उपयोग करें:
- शारीरिक
अक्षमता ♿ (रैंप, सुलभ डेस्क की ज़रूरत)
- दृष्टि
अक्षमता 👓 (ब्रेल लिपि, छूने वाले मॉडल)
- श्रवण
अक्षमता (सांकेतिक भाषा, दृश्य सामग्री)
- अधिगम
अक्षमता (सीखने की नई-नई खेल विधियां)
- बहु-बाधित
बच्चे (व्यक्तिगत ध्यान और प्यार)
3: शिक्षा की 'मुख्यधारा' क्या है? (Concept of Mainstreaming)
'मुख्यधारा' (Mainstreaming) का सबसे सरल अर्थ है— समाज की
बहती हुई सामान्य नदी में विशेष (दिव्यांग) बच्चों को भी शामिल कर लेना। जिस तरह एक बड़ी नदी में छोटी-छोटी धाराएं आकर मिल जाती हैं, उसी तरह सामान्य शिक्षा की कक्षा में विशेष बच्चों को शामिल करना
ही 'मुख्यधारा' है ।
आइए, इसे बिना
किसी किताबी बोझ के, बहुत ही आसान भाषा और नए उदाहरणों के साथ
समझते हैं।
1. मुख्यधारा का इतिहास और आसान अर्थ (History and Meaning)
पुराने समय में माना जाता था कि
दिव्यांग बच्चों की ज़रूरतें अलग हैं, इसलिए
उन्हें अलग 'स्पेशल स्कूल' में पढ़ाना चाहिए । लेकिन आधुनिक शिक्षा मानती है कि असली दुनिया में तो उन्हें
सामान्य लोगों के साथ ही रहना है । इसलिए उन्हें बचपन से ही सामान्य स्कूल में पढ़ाना चाहिए ।
- परीक्षा
के लिए मुख्य जानकारी: इस अवधारणा को शुरू करने का श्रेय अमेरिकी विद्वान सैम्युअल
ग्रिडले होवे (Samuel Gridley Howe) को जाता है । उन्होंने दृष्टिबाधित और श्रवणबाधित बच्चों को सामान्य
स्कूल में पढ़ाने की वकालत की । इसके बाद साल 1975 में अमेरिका में 'सभी अपंगों के लिए शिक्षा' (Education for All Handicapped
Children Act) कानून बना ।
- उदाहरण: मान लीजिए
शहर में एक नया पार्क बना है। अगर हम पार्क के गेट पर लिख दें "यहाँ
केवल दौड़ने वाले लोग आ सकते हैं, व्हीलचेयर वाले नहीं", तो यह अलगाव है। लेकिन अगर हम पार्क के गेट पर रैंप बना दें ताकि व्हीलचेयर
वाला व्यक्ति भी सामान्य लोगों के साथ टहल सके, तो यही 'मुख्यधारा' है ।
2. कोफमैन (Kauffman) की प्रसिद्ध परिभाषा (Scientific Definition)
बी.एड. की परीक्षा में अच्छे अंक
लाने के लिए किसी विद्वान की परिभाषा लिखना बहुत ज़रूरी होता है।
- परीक्षा
के लिए मुख्य जानकारी: कोफमैन के अनुसार— "शिक्षा की मुख्यधारा का अर्थ है
योग्य विशेष बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ शैक्षिक, सामाजिक और अनुदेशनात्मक रूप से एक
साथ जोड़ना । यह एक
सुनियोजित योजना है जिसमें सामान्य और विशेष शिक्षकों की जिम्मेदारियां तय
होती हैं । "
- उदाहरण: जैसे एक
क्रिकेट टीम में ग्यारह खिलाड़ी होते हैं। कोई बहुत अच्छा बल्लेबाज है, कोई बहुत अच्छा गेंदबाज है और कोई
अच्छा क्षेत्ररक्षक (Fielder) है।
कप्तान सबको उनकी क्षमता के अनुसार जिम्मेदारी देता है ताकि टीम जीते।
मुख्यधारा में भी शिक्षक हर बच्चे की क्षमता के अनुसार उसे कक्षा में शामिल
करता है ।
3. मुख्यधारा के बुनियादी नियम (Basic Rules of Mainstreaming)
विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि
मुख्यधारा कुछ बुनियादी नियमों पर काम करती है:
- विशेष
बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ पढ़ने का पूरा अवसर मिले ।
- यदि
सामान्य कक्षा में पढ़ाना मुमकिन न हो, तभी उन्हें विशेष पूरक सामग्री (जैसे ब्रेल बुक्स, हियरिंग एड) दी जाए ।
- यह एक
निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो बच्चे की व्यक्तिगत ज़रूरत के हिसाब से तय
होती है ।
मुख्यधारा को चलाने वाले 3 सबसे मज़बूत स्तंभ/घटक (Components)
कोफमैन की परिभाषा के अनुसार
मुख्यधारा के तीन सबसे महत्वपूर्ण घटक (Components) होते हैं:
क. कक्षा में एक साथ लाना (Integration in Education)
यह दूरी मिटाने की प्रक्रिया है । पुराने समय में बच्चों को परिवार और
दोस्तों से दूर 'स्पेशल स्कूल' में बंद कर दिया जाता था (पृथक्करण) । एकीकरण इसके उलट बच्चों को समाज के करीब
लाता है ।
- भौतिक
एकीकरण: बच्चे
सामान्य स्कूल की इमारत में आएं ।
- सामाजिक
एकीकरण: सामान्य
बच्चे और शिक्षक उन्हें खुले दिल से स्वीकार करें ।
- निर्देशात्मक
एकीकरण (Instructional
Integration): शिक्षक
पढ़ाते समय ऐसे तरीके अपनाए कि विशेष बच्चे को समझने में कोई परेशानी न हो ।
ख. सही योजना और पढ़ाई के कार्यक्रम (Educational Planning)
सिर्फ बच्चे को सामान्य कक्षा में
लाकर बैठा देना काफी नहीं है । उसके लिए पहले से योजना बनानी पड़ती है ।
- उदाहरण: यदि कक्षा
में कोई बच्चा व्हीलचेयर पर है, तो शिक्षक की जिम्मेदारी है कि विज्ञान की प्रयोगशाला (Science Lab) की मेज की ऊंचाई थोड़ी कम रखी जाए
ताकि व्हीलचेयर पर बैठा बच्चा भी खुद से प्रयोग (Experiment) कर सके ।
ग. ज़िम्मेदारियों का बंटवारा (Clarification of Responsibilities)
अक्सर स्कूलों में जब सामान्य शिक्षक
और विशेष शिक्षक (Special Educator) दोनों होते हैं, तो भ्रम हो जाता है कि बच्चे की ज़िम्मेदारी किसकी है । मुख्यधारा को सफल बनाने के लिए दोनों को
अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियाँ साफ़ तौर पर पता होनी चाहिए ।
बी.एड. छात्रों के लिए परीक्षा उपयोगी टिप्स (Exam Special Note)
अपनी उत्तर पुस्तिका में इस
कॉन्सेप्ट को स्पष्ट करने के लिए इस तुलनात्मक अंतर को ज़रूर लिखें:
|
पुरानी सोच (पृथक्करण / Segregation) |
आधुनिक सोच (मुख्यधारा / Mainstreaming) |
|
बच्चों को समाज से दूर विशेष
संस्थाओं में रखना । |
बच्चों को सामान्य स्कूल और कक्षा
में शामिल करना । |
|
इससे बच्चों में हीन भावना आती है । |
इससे बच्चों में आत्मविश्वास और
भाईचारा बढ़ता है । |
|
यह व्यवस्था बहुत खर्चीली और जटिल
है । |
यह व्यवस्था कम खर्चीली और अधिक
प्राकृतिक है । |
4: स्कूल में 'मुख्यधारा' को सफल बनाने वाले 3 मजबूत स्तंभ /घटक (Components of Mainstreaming)
सिर्फ कागजों पर नियम बना देने से
बच्चे मुख्यधारा में शामिल नहीं हो जाते । स्कूल में इसे हकीकत में बदलने के लिए तीन चीज़ों (घटकों) का
होना बहुत ज़रूरी है:
1. दूरी मिटाना और एक साथ लाना (एकीकरण / Integration in Education)
एकीकरण का सीधा अर्थ है— बच्चों को
समाज और सामान्य स्कूल के करीब लाना । पुराने समय में बच्चों को परिवार से दूर 'स्पेशल स्कूल' में बंद कर दिया जाता था, जो एक अलगाव (Separation)
था । एकीकरण इस अलगाव को खत्म करता है । यह तीन स्तरों पर काम करता है:
- 🏢 भौतिक रूप से साथ लाना (Physical Integration): इसका मतलब है कि विशेष बच्चा और
सामान्य बच्चा एक ही स्कूल की छत के नीचे पढ़ाई करें ।
- ❤️ समाज द्वारा अपनाना (Social Integration): सामान्य बच्चे और शिक्षक उन्हें खुले दिल से स्वीकार करें, उनके साथ लंच करें, खेलें और बातें करें ।
- 📖 सिखाने के तरीके में बदलाव (Instructional Integration): शिक्षक पढ़ाते समय ऐसे तरीके अपनाए कि
विशेष बच्चे को समझने में कोई परेशानी न हो ।
- परीक्षा
के लिए मुख्य जानकारी: यह तीनों एकीकरण मिलकर ही 'सच्चा समावेशन' (True Inclusion) बनाते हैं ।
- उदाहरण: जब स्कूल
में कोई नाटक या डांस प्रतियोगिता होती है, तो व्हीलचेयर पर बैठे बच्चे को सिर्फ दर्शक बनाकर नहीं
बिठाया जाता, बल्कि उसे
नाटक में कोई ऐसा किरदार दिया जाता है जिसे वह बैठकर भी निभा सके। यही सच्चा
एकीकरण है!
2. पढ़ाई की सही प्लानिंग और तैयारी (Educational Planning and Programming)
सिर्फ बच्चे को लाकर सामान्य कक्षा
में बैठा देना काफी नहीं है । अगर उसे समझ नहीं आ रहा, तो वह
पीछे छूट जाएगा । इसके लिए
पहले से बहुत सावधानीपूर्वक योजना (Planning) बनानी पड़ती है ।
- परीक्षा
के लिए मुख्य जानकारी: बी.एड. के छात्रों को यह शब्द ज़रूर याद रखना चाहिए— IEP (Individualized Education
Program - व्यक्तिगत शैक्षिक योजना)। इसका मतलब है हर बच्चे की ज़रूरत के
हिसाब से अलग योजना बनाना । इसमें सामान्य शिक्षक और विशेषज्ञ दोनों की ज़रूरत होती है ।
- उदाहरण: मान लीजिए
कक्षा में विज्ञान की लैब (Science Lab) का पीरियड है । यदि कक्षा में कोई व्हीलचेयर वाला बच्चा है, तो स्कूल की ज़िम्मेदारी है कि लैब की
मेज (Table) की ऊंचाई
थोड़ी कम रखी जाए ताकि वह बच्चा भी खुद से बीकर और टेस्ट ट्यूब उठाकर प्रयोग
(Experiment)
कर सके और
आत्मनिर्भर बन सके।
3. कौन क्या काम करेगा? ज़िम्मेदारियों का बंटवारा (Clarification of Responsibilities)
अक्सर स्कूलों में जब सामान्य शिक्षक
और विशेष शिक्षक (Special Educator) दोनों होते हैं, तो भ्रम हो जाता है कि बच्चे की ज़िम्मेदारी किसकी है । मुख्यधारा को सफल बनाने के लिए दोनों को
अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियाँ साफ़ तौर पर पता होनी चाहिए ।
- परीक्षा
के लिए मुख्य जानकारी: इसे "सह-शिक्षण" (Co-teaching) कहते हैं। दोनों शिक्षकों को एक टीम की तरह काम करना होता है, जहाँ एक सामान्य पाठ्यक्रम संभालता है
और दूसरा विशेष बच्चे की ज़रूरतों को ।
- उदाहरण: जब
सामान्य टीचर ब्लैकबोर्ड पर गणित का सवाल समझा रहा होता है, तो उसी समय स्पेशल टीचर कक्षा में
घूम-घूम कर यह देखता है कि धीमी गति से सीखने वाले (Slow Learner) बच्चे ने कॉपी में सही लिखा है या नहीं।
इसे कहते हैं टीम वर्क!
परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए 'क्विक रिवीजन' माइंड मैप
अपनी उत्तर पुस्तिका के अंत में इस
टेबल को बनाकर आप परीक्षक (Examiner)
को प्रभावित कर सकते हैं:
|
विषय (Topic) |
मुख्य और सरल अर्थ (Key Point) |
भावी शिक्षक के लिए संदेश |
|
अवस्थाएँ (Phases) |
बच्चे को उसकी क्षमता के अनुसार
धीरे-धीरे सामान्य कक्षा में लाना । |
बच्चे पर दबाव न डालें, उसकी गति का सम्मान करें । |
|
कार्य-क्षेत्र (Scope) |
शारीरिक, मानसिक, बहु-बाधित
और सीखने में अक्षम बच्चे । |
कोई भी बच्चा शिक्षा की रोशनी से
अछूता नहीं रहना चाहिए । |
|
मुख्यधारा (Mainstreaming) |
बच्चे को अलग-थलग न रखकर सामान्य
समाज और स्कूल का हिस्सा बनाना । |
भेदभाव मिटाना और सबको गले लगाना
ही सच्ची मानवता है । |
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