विशिष्ट शिक्षा तथा समावेशी
शिक्षा की तुलना (Comparison between Special Education and Inclusive Education)
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) और
विशिष्ट शिक्षा (Special Education) के बीच मुख्य अंतर को समझना
बहुत जरूरी है। नीचे दी गई तालिका में इन दोनों के बीच के प्रमुख अंतरों को
विस्तार से समझाया गया है:
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तुलना का आधार |
विशिष्ट शिक्षा (Special
Education) |
समावेशी शिक्षा (Inclusive
Education) |
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1. परिभाषा |
यह केवल दिव्यांग बच्चों के लिए अलग से बनाई गई शिक्षा
व्यवस्था है। |
यह सभी बच्चों (सामान्य और दिव्यांग) को एक साथ एक ही कक्षा
में पढ़ाने की व्यवस्था है। |
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2. वातावरण |
इसमें बच्चों को अलग वातावरण या विशेष स्कूलों में पढ़ाया जाता
है। |
इसमें बच्चों को सामान्य स्कूल और प्राकृतिक वातावरण में
पढ़ाया जाता है। |
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3. पाठ्यक्रम |
इसका पाठ्यक्रम विशेष रूप से केवल दिव्यांग बच्चों की सीमाओं को देख कर बनाया जाता है। |
इसका पाठ्यक्रम लचीला होता है ताकि सभी प्रकार के बच्चे एक साथ
सीख सकें। |
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4. शिक्षक |
इसमें केवल विशेष प्रशिक्षित (Special Educators) शिक्षकों की आवश्यकता होती है। |
इसमें सामान्य शिक्षक और विशेष शिक्षक दोनों मिलकर काम करते
हैं। |
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5. मुख्य उद्देश्य |
इसका उद्देश्य बच्चे की कमी को दूर करना या उसे अलग से कौशल
सिखाना है। |
इसका उद्देश्य सभी बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और
समानता लाना है। |
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6. बच्चों का मेलजोल |
इसमें बच्चे केवल अपने जैसे दिव्यांग बच्चों के साथ ही मेलजोल
कर पाते हैं। |
इसमें दिव्यांग बच्चे सामान्य बच्चों के साथ सामाजिक कौशल और
आत्मविश्वास सीखते हैं। |
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7. शिक्षण विधियाँ |
इसमें विशेष उपकरणों और बहुत ही विशिष्ट विधियों का उपयोग होता
है। |
इसमें बहु-संवेदी (Multi-sensory) और सहकारी शिक्षण विधियों का उपयोग होता है। |
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8. मनोवैज्ञानिक प्रभाव |
अलग स्कूल होने के कारण बच्चों में हीन भावना या अलगाव महसूस
हो सकता है। |
एक साथ पढ़ने से बच्चों में आत्मविश्वास और अपनत्व की भावना
बढ़ती है। |
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9. लागत (Cost) |
यह व्यवस्था बहुत महंगी होती है क्योंकि इसमें अलग बुनियादी
ढाँचे की जरूरत होती है। |
यह तुलनात्मक रूप से कम खर्चीली है क्योंकि इसमें मौजूदा
संसाधनों का ही उपयोग होता है। |
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10. लचीलापन |
यह एक कठोर ढाँचा है जो केवल विशिष्ट आवश्यकताओं पर केंद्रित
है। |
यह एक बहुत ही लचीला ढाँचा है जो हर बच्चे की गति के अनुसार
बदलता है। |
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11. स्कूल का प्रकार |
ये विशेष आवासीय या डे-केयर स्कूल होते हैं। |
ये आपके पड़ोस के सामान्य स्कूल होते हैं। |
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12. समाजीकरण |
इसमें सामाजिक दूरी बनी रहती है क्योंकि बच्चा समाज से कटा
रहता है। |
यह समाज में विविधता को स्वीकार करना और भाईचारा सिखाता है। |
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13. मूल्यांकन |
मूल्यांकन केवल बच्चे की विशिष्ट अक्षमता के आधार पर होता है। |
मूल्यांकन बच्चे की क्षमता और व्यक्तिगत सुधार के आधार पर होता
है। |
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14. प्रवेश प्रक्रिया |
इसमें प्रवेश के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट और जांच अनिवार्य होती
है। |
इसमें बिना किसी भेदभाव के हर बच्चे का स्वागत किया जाता है। |
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15. दार्शनिक विचार |
इसका मानना है कि बच्चे को सिस्टम के हिसाब से बदलना चाहिए। |
इसका मानना है कि सिस्टम को बच्चे की जरूरत के हिसाब से बदलना
चाहिए। |
निष्कर्ष:
·
विशिष्ट शिक्षा : अलगाव (Segregation)
पर आधारित है, जहाँ बच्चे को
"अलग" मानकर अलग से सिखाया जाता है।
·
समावेशी शिक्षा : अधिकार
आधारित (Rights-based) दृष्टिकोण है, जो कहता
है कि शिक्षा का अधिकार हर बच्चे को समान रूप से मिलना चाहिए, चाहे उसकी
शारीरिक या मानसिक स्थिति कैसी भी हो।
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