मार्गदर्शन का अर्थ एवं मार्गदर्शन की प्रकृति | Meaning of Guidance and Nature of Guidance

जीवन के प्रत्येक मोड़ पर हमें एक ऐसे पथ प्रदर्शक की आवश्यकता होती है जो हमें हमेशा कामयाबी की तरफ अग्रसर करता है तो आज हम एक ऐसे ही विषय पर चर्चा करने वाले हैं जिसका नाम है मार्गदर्शन अथवा निर्देशन जिसे इंग्लिश की भाषा में गाइडेंस कहते हैं।

मार्गदर्शन का अर्थ(Meaning of Guidance):

मार्गदर्शन का शाब्दिक अर्थ होता है रास्ता दिखलाना अथवा पथ प्रदर्शन करना। जब कोई व्यक्ति प्रतिकूल परिस्थितियों एवं समस्याओं से जूझ रहा होता है तो उसे उस समस्या से बाहर आने के लिए अथवा उसे समाप्त करने के लिए उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर के व्यक्ति किसी भी प्रकार की समस्या एवं बाधा को पार करके आगे बढ़ता है।

किसी भी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप अथवा व्यक्तियों के समूह को सामूहिक रूप से उन्नति पथ पर अग्रसर करने के लिए दी गई सहायता मार्गदर्शन में शामिल की जाती है। मार्गदर्शन से व्यक्ति यह तय करता है कि वह किस ओर जाना चाहता है अथवा क्या करना चाहता है और वह इस कार्य को कितना अच्छा कर सकता है। यह एक व्यक्ति केंद्रित प्रक्रिया होती है जिसमें केंद्र का मुख्य बिंदु एक व्यक्ति होता है। मार्गदर्शन अथवा निर्देशन की सहायता से व्यक्ति को उसकी शक्तियों एवं योग्यताओं का एहसास कराया जाता है ताकि वह अपनी समस्याओं को स्वयं ही हल कर सके।

मार्गदर्शन अथवा निर्देशन की परिभाषाएं(Definition of Guidance and Nature of Guidance)

भारतीय शिक्षा आयोग के अनुसार- " मार्गदर्शन शिक्षार्थियों के शिक्षण संस्थानों और घर में स्थितियों के लिए सर्वोत्तम संभव समायोजन करने में में सहायता करता है और साथ ही साथ व्यक्तित्व के सभी पहलुओं के विकास को सुविधाजनक बनाता है।"

यूनाइटेड स्टेट ऑफिस ऑफ एजुकेशन के अनुसार मार्गदर्शन अथवा निर्देशन - "विशेष प्रशिक्षण सहित विभिन्न तरीकों से व्यक्ति को परिचित करने की प्रक्रिया जिसमें वह अपने प्राकृतिक बंदोबस्तों की खोज कर सकता है ताकि वह अपने सबसे अच्छे लाभ के लिए और समाज के लिए जीवन यापन करे।"

स्किनर के अनुसार- मार्गदर्शन एक ऐसी प्रक्रिया है जो युवाओं को स्वयं एवं दूसरों को परिस्थितियों के प्रति समायोजन करने में सहायता प्रदान करता है।

सर जोन्स के अनुसार - "मार्गदर्शन में किसी के द्वारा दी गई व्यक्तिगत सहायता शामिल है मार्गदर्शन/निर्देशन को सहायता के लिए ही बनाया गया है

 ताकि व्यक्ति यह तय करने के लिए कि वह किस क्षेत्र में जाना चाहता है, वह वास्तव में क्या करना चाहता है और कितना अच्छा कर सकता है उसके सभी उद्देश्यों को पूरा करना।”

नैप के अनुसार मार्गदर्शन- विद्यार्थी के बारे में व्यक्तिगत रूप से सीखना उसे खुद से सीखने में सहायता करना उसको एवं उसके वातावरण बदलाव लाना जोकि जितना संभव हो सके उसकी वृद्धि और विकास में सहायता कर सकें।

रुथ-स्ट्रोंग  की परिभाषा के अनुसार उन्होंने मार्गदर्शन को इस प्रकार परिभाषित किया है - मार्गदर्शन का उद्देश्य उसके लिए उपलब्ध संभावनाओं के संदर्भ में प्रत्येक बच्चे के अधिकतम विकास को बढ़ावा देना है

डंसमूर और मिलर के अनुसार - "मार्गदर्शन एक ऐसा साधन है जो व्यक्तियों को बुद्धिमानी से शैक्षिक, व्यावसायिक और व्यक्तिगत अवसरों को समझने और उपयोग करने में मदद करता है। अथवा विकसित और व्यवस्थित सहायता के रूप में छात्रों को स्कूल और जीवन में संतोषजनक समायोजन प्राप्त करने में सहायता मिलती है।"

मार्गदर्शन अथवा निर्देशन की प्रकृति(Nature of Guidance)

मार्गदर्शन के भावार्थ और इनकी उपरोक्त सभी परिभाषाओं को मध्य नजर रखते हुए हम मार्गदर्शन अथवा निर्देशन की प्रकृति को निम्नलिखित बिंदुओं से प्रदर्शित कर सकते हैं।

  • मार्गदर्शन एक विकासात्मक प्रक्रिया है|।
  • मार्गदर्शन एक सतत प्रक्रिया है जो कि निरंतर विकास की ओर चलती है।
  • मार्गदर्शन व्यक्ति की विभिन्न परिस्थितियों अपने समायोजन कराने की प्रक्रिया है।
  • मार्गदर्शन पूर्णता व्यक्ति पर निर्भर करता है।
  • मार्गदर्शन एक कौशल युक्त प्रक्रिया है।
  • मार्गदर्शन एक आत्म दर्शन करने की प्रक्रिया है जो कि व्यक्ति को स्वयं की क्षमता एवं शक्तियों से परिचित कराता है।

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