इंटरव्यू/साक्षात्कार किसे कहते हैं? What is Interview?

इंटरव्यू /साक्षात्कार किसे कहते हैं?

हम दिन प्रतिदिन समाचार देखते वक्त यह देखते हैं कि किसी न किसी न्यूज़ चैनल पर एक रिपोर्टर अपने हाथ में माइक पकड़ कर किसी व्यक्ति से कुछ सवाल-जबाब करता है और अपने उद्देश्यों को प्राप्त करता है।

उदाहरण के लिए : अक्षय कुमार ने हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लिया जिसमें अक्षय ने मोदी जी से बहुत सारी बातें/सवाल जबाब किये और इस वार्तालाप का मुख्य उद्देश्य था कि देश की समग्र जनता प्रधानमंत्री जी के बारे में वो बातें जान सके जो वे नहीं जानते थे।



इस प्रकार हम कह सकते हैं कि "दो या दो से अधिक व्यक्ति किसी विशेष उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आमने-सामने बैठकर जो एक दूसरे से बातें करते हैं सामन्यतः उसे ही साक्षात्कार कहा जाता है।"

साक्षात्कार का अर्थ :

साक्षात्कार, अंग्रेजी के 'इंटरव्यू' (interview) शब्द का हिंदी रूपांतरण है। 'इंटरव्यू' (interview) शब्द का दो शब्दों Inter + View से मिलकर बना है। जिसमें 'Inter' का अर्थ होता है-भीतरी, और 'View' का अर्थ -अवलोकन से होता है। अर्थात साक्षात्कार (इंटरव्यू) का अर्थ किसी के भीतरी अवलोकन करने से होता है। इस प्रकार साक्षात्कार के द्वारा हम किसी व्यक्ति का भीतरी अवलोकन किया जाता है।


साक्षात्कार की परिभाषाएं :

  • William J. Gud and Paul K. Hatt के अनुसार : "किसी विशेष उद्देश्य से किया गया गंभीर वार्तालाप ही साक्षात्कार कहलाता है।"

  • Jhon D. Darle के अनुसार : " उद्देश्यपूर्ण वार्तालाप ही साक्षात्कार है।"

  • Dezin के शब्दों में -: "साक्षात्कार आमने सामने किया गया संवादोचित आदान-प्रदान होता है जिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से कुछ सूचनाएं प्राप्त करता है।"

  • Pauline V. Young के अनुसार -: "साक्षात्कार ऐसी प्रणाली है जिसके द्वारा एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के आंतरिक जीवन में कम अथवा अधिक कल्पनात्मक रूप से प्रवेश करता है और तुलनात्मक रूप से वह व्यक्ति अपरिचित होता है।"

  • M. N. Basu के अनुसार -: "साक्षात्कार, व्यक्तियों के आमने-सामने का कुछ बातों पर मिलना या एकत्र होना कहा जा सकता है।"

साक्षात्कार की विशेषताएं:

उपरोक्त सभी परिभाषाओं को मद्देनजर रखते हुए साक्षात्कार में मुख्यतः तीन विशेषताएं पाई जाती है।

  1. साक्षात्कार, आमने सामने की जाने वाली बातचीत है।

  2. एक-दूसरे से संबंध स्थापित करने का साधन होता है।

  3. साक्षात्कार करने वाले व्यक्ति को साक्षात्कार के उद्देश्यों का ज्ञान होता है।

साक्षात्कार के प्रकार :

साक्षात्कार भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं। जिनमें से तीन प्रमुख है। जोकि निम्नलिखित है।
  1. निर्देशित साक्षात्कार

  2. अनिर्देशित साक्षात्कार

  3. चयनशील/सारग्राही/समाहारक साक्षात्कार

निर्देशित साक्षात्कार-:

निर्देशित साक्षात्कार में पूर्व से ही एक प्रश्नावली तैयार की जाती है जिसमें जिसमें साक्षात्कार की विधि समय प्रश्नों की भाषा और प्रश्नों की संख्या को साक्षात्कार से पहले ही निश्चित कर सभी प्रत्याशियों से उसी क्रम में प्रश्नों को पूछा जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो वह साक्षात्कार जिसमें साक्षात्कार के प्रश्नों को पूर्व में ही तैयार कर लिया जाता है निर्देशित साक्षात्कार कहलाता है।

अनिर्देशित साक्षात्कार-:

अनिर्देशित साक्षात्कार के अंतर्गत मुक्त प्रश्न उत्तर पूछे जाते हैं जोकि व्यक्ति की समस्या समाधान से संबंधित होता है इसलिए इस साक्षात्कार को निदानात्मक साक्षात्कार के नाम से भी जाना जाता है। यह साक्षात्कार गहन साक्षात्कार भी कहलाता है क्योंकि इस साक्षात्कार में व्यक्ति से पूछे गए सवालों से ही अन्य सवाल तैयार किए जाते हैं और उस विषय की पूर्ण जानकारी ली जाती है।

चयनशील/सारग्राही/समाहारक साक्षात्कार-:

चयनशील साक्षात्कार के अंतर्गत निर्देशित एवं अनिर्देशित दोनों ही साक्षात्कार मौजूद होते हैं जिसके अंतर्गत इन दोनों साक्षात्कार के गुणों का समावेश पाया जाता है। समाहारक साक्षात्कार के दौरान अथवा अंत में साक्षात्कार लेने वाला व्यक्ति प्रत्याशी से पूछे गए प्रश्न का निष्कर्ष एवं सार कथन भी ले सकता है जिससे वह उस व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता का आकलन भी कर पाता है। आजकल सभी साक्षात्कार जोकि नौकरियों के लिए लिए जाते हैं उनमें समाहारक साक्षात्कार का विशेष उपयोग किया जाता है।

साक्षात्कार के लाभ

  • साक्षात्कार के द्वारा व्यक्ति को जानना सरल हो जाता है।

  • साक्षात्कार के द्वारा अधिक से अधिक सूचनाएं प्राप्त की जा सकती हैं।

  • साक्षात्कार द्वारा किसी विषय का अध्ययन सरल एवं सुगम हो जाता है।

  • साक्षात्कार से व्यक्ति के विचारों को जानना बहुत सरल हो जाता है।

  • साक्षात्कार बातचीत की प्रक्रिया को सरल बनाता है।

साक्षात्कार की सीमाएं

  1. साक्षात्कार उद्देश्य पूर्ण होना आवश्यक है।

  2. साक्षात्कार अधिक विश्वसनीय नहीं माना जाता है।

  3. साक्षात्कार लेते समय दूसरा व्यक्ति अधिक जवाबों को अपने मन से ही देता है जोकि कम विश्वसनीय एवं वैद्य होता है।

  4. साक्षात्कार अधिक लचीला होता है।

  5. साक्षात्कार अभ्यर्थी के मानसिक एवं संवेगात्मक भावनाओं पर निर्भर करता है।

  6. साक्षात्कारकर्ता अपने अनुसार ही साक्षात्कार लेता है।

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