पोर्टफोलियो किसे कहते हैं?

पोर्टफोलियो किसे कहते हैं?


परिचय:

वर्तमान शिक्षा प्रणाली सतत एवं व्यापक मूल्यांकन पर आधारित है सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में बच्चों के व्यवहार में होने वाले व्यवहारगत परिवर्तन को समय-समय पर आकलन किया जाता है। जो कि बच्चों के चौमुखी विकास के लिए बहुत आवश्यक है। बच्चों का समय समय पर आकलन करने हेतु भिन्न भिन्न प्रकार की प्रणालियों को अपनाया जाता है जिसमें से एक पोर्टफोलियो भी है।

किसी विद्यार्थी के व्यवहार में होने वाले परिवर्तन का आकलन करने के लिए विद्यार्थी के सभी पक्षों की जानकारी होना आवश्यक है विद्यार्थी के सभी पक्षों की सूचनाओं को एकत्रित करने के लिए जो दस्तावेजों का संग्रह होता है वह पोर्टफोलियो कहलाता है। मुख्य तो पोर्टफोलियो भिन्न भिन्न प्रकार की जानकारियों का संग्रह दस्तावेज होता है और यह अलग-अलग जगह पर अलग-अलग प्रकार से बनाया जा सकता है किंतु यहां पर हम विद्यार्थियों की बात कर रहे हैं इसलिए हम विद्यार्थियों से संबंधित पोर्टफोलियो के बारे में ही पढ़ेंगे।

पोर्टफोलियो का अर्थ:-

किसी भी विषय,संस्थान /व्यक्ति विशेष से संबंधित है समस्त जानकारियों का संग्रह जिस दस्तावेज में होता है उसे पोर्टफोलियो कहते हैं।

पोर्टफोलियो की परिभाषा :

अधिगम की प्रक्रिया के दौरान छात्र के व्यवहार में होने वाले व्यवहारगत परिवर्तन के मूल्यांकन हेतु विद्यार्थी की उपलब्धियां, कमियां, व्यक्तिगत जीवन संबंधी जानकारी, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, विद्यार्थी द्वारा किए जाने वाले क्रियाकलापों इत्यादि अवधि अनुसार समस्त जानकारियों का संग्रह करने के लिए एक दस्तावेज तैयार किया जाता है जिससे शिक्षक को विद्यार्थी के समस्त पक्षों का मूल्यांकन करने में आसानी हो , वह दस्तावेज पोर्टफोलियो कहलाता है।

पोर्टफोलियो के उद्देश्य-

शिक्षक के संदर्भ में:-

1 छात्रों को के सभी पक्षों की जानकारी प्राप्त करना। 
2 छात्रों का आकलन एवं मूल्यांकन करना। 
3 छात्रों की रुचि जानना। 
4 छात्रों हेतु अधिगम की योजनाओं का निर्माण करना। 
5 छात्रों की कमियों को दूर करना।

छात्र के संदर्भ में:-

1 स्वयं का मूल्यांकन करना। 
2 स्वयं की कमियों को दूर कर, कौशलों का विकास करना। 
3 स्व अध्ययन की रणनीतियों को सरल करना।

अभिभावक के संदर्भ में:-

1 अपने बच्चों की उपलब्धियां एवं कमियों को जानना। 
2 अपने बच्चों की कमियों को पहचान कर दूर करने का प्रयास करना। 
3 अपने बच्चों कि विद्यालय में सक्रियता एवं सहभागिता को जानना।


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