मोहब्बत इतनी कि मुझे नबाब कर देती है | Mohabbat itni ki mujhe nawab kar deti hai | Parnassianscafe




मोहब्बत इतनी कि मुझे नबाब कर देती है।
मज़बूरियाँ  उसकी  ला-ज़बाब कर देती है।।

हक़ीक़तन इश्क़ अब भी करती है मुझसे।
मेरी हक़ीक़त को वो ख़ाब कर देती है।।

एक ग़ज़ब की अदा है उसके हाथों में।
छुए जो पानी तो पानी को शराब कर देती है।।

बोसा-ऐ-हक़ कुछ इस क़दर लेती है।
मेरे लबों को अपना ग़ुलाब कर देती है।।

चौदहवीं के चाँद की तरह है 'ललित' ।
मुझसे लिपटकर मुझे आफ़्ताब कर देती है।।



mohabbat itanee kee mujhe nabaab kar detee hai.
mazabooriyaan  usakee  la-zabaab kar detee hai..

haqeeqatan  ishq  ab  bhee karatee hai mujhase.
meree  haqeeqat  ko  vo  khaab  kar  detee hai..

ek   gazab  kee  ada  hai   usake  haathon  mein.
chhue jo paanee to paanee ko sharaab kar detee hai..

bosa-ai-haq  kuchh  is  qadar  letee hai.
mere labon ko apana gulaab kar detee hai..

chaudahaveen    ke   chaand    kee   tarah   hai   lalit.
mujhase lipatakar mujhe aaftaab kar detee hai..

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2 Comments

  1. वाह बेहतरीन 👌👌👌❤

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    1. शुक्रिया दोस्त ❤️💐💐

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